बाज ने दी शिकारी को सीख
एक शिकारी ने जाल में एक बाज को पकड़ लिया। शिकारी जब बाज को लेकर जाने लगा तब रास्ते में बाज ने शिकारी से कहा - “तुम मुझे लेकर क्यों जा रहे हो?”शिकारी बोला - “ मैं तुम्हे मारकर खाने के लिए ले जा रहा हूं।”
बाज बोला - “देखो, मुझे जितना जीवन जीना था मैंने जी लिया और अब मेरा मरना निश्चित है, लेकिन मरने से पहले मेरी एक आखिरी इच्छा है।”
शिकारी ने कहा - “बताओ अपनी इच्छा?”
बाज ने बताया - पहली सीख तो यह कि किसी कि बातों का बिना प्रमाण, बिना सोचे-समझे विश्वास मत करना और दूसरी ये कि यदि तुम्हारे साथ कुछ बुरा हो या तुम्हारे हाथ से कुछ छूट जाए तो उसके लिए कभी दुखी मत होना।
कुछ समय बाद बाज ने शिकारी से कहा- “अगर मैं तुम्हे कुछ ऐसा दे दूं जिससे तुम अमीर बन जाओ तो क्या तुम मुझे आजाद करोगे?”
शिकारी बोला - “ क्या है वो चीज, जल्दी बताओ?”
बाज बोला - “ दरअसल, बहुत पहले मुझे राजमहल के करीब एक हीरा मिला था, जिसे उठा कर मैंने एक गुप्त स्थान पर रख दिया था। अगर आज मैं मर जाऊंगा तो वो हीरा इसे ही बेकार चला जाएगा, इसलिए मैंने सोचा कि अगर तुम उसके बदले मुझे छोड़ दो तो मेरी जान भी बच जाएगी।”
यह सुनते ही शिकारी ने बाज को आजाद कर दिया और वो हीरा लाने को कहा।
बाज उड़ कर पेड़ शाखा पर बैठ गया और बोला - “ कुछ देर पहले ही मैंने तुम्हे एक सीख दी थी कि किसी के भी बातों का तुरंत विश्वास मत करना लेकिन तुमने उस सीख का पालन नहीं किया।”
यह सुनते ही शिकारी मायूस हो पछताने लगा, तभी बाज फिर बोला - तुम मेरी दूसरी सीख भूल गए कि अगर कुछ तुम्हारे साथ कुछ बुरा हो तो उसके लिए तुम कभी पछतावा मत करना।”
कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि हमें किसी अनजान व्यक्ति पर आसानी से विश्वास नहीं करना चाहिए और किसी प्रकार का नुक्सान होने या असफलता मिलने पर दुखी नहीं होना चाहिए।
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