Saturday, 26 November 2016

कार्तिक पूर्णिमा को करें गंगा स्नान और दीपदान

                                 कार्तिक पूर्णिमा को करें गंगा स्नान और दीपदान

कार्तिक मास की पूर्णिमा बड़ी पवित्र तिथि है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि ने इस तिथि को परम पुण्यदायी बताया है। इस दिन गंगा स्नान तथा शाम के समय दीपदान करने का विशेष महत्त्व है। पुराणों के अनुसार, इस दिन किए गए दान, जपादि का दस यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है। इस दिन यदि कृत्तिका नक्षत्र हो तो यह महाकार्तिकी होती है, भरणी हो तो विशेष फल देती है और यदि रोहिणी हो तो इसका फल और भी बढ़ जाता है।
जो व्यक्ति पूरे कार्तिक मास स्नान करते हैं, उनका नियम कार्तिक पूर्णिमा को पूरा हो जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रीसत्यनारायण व्रत की कथा सुनी जाती है। शाम के समय मंदिरों, चौराहों, पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधों के पास दीप जलाए जाते हैं और नदियों में दीपदान किया जाता है। काशी में यह तिथि देवदीपावली महोत्सव के रूप में मनाई जाती है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान का विशेष महत्व है। इस दिन जो भी दान किया जाता है उसका कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन अन्ना, धन व वस्त्र दान का विशेष महत्व है। मान्यता तो यह भी है कि इस दिन व्यक्ति जो भी दान करता है वह मृत्युपरांत स्वर्ग में उसे पुन: प्राप्त होता है।
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नाम के असुर का अंत किया था और भगवान विष्णु ने उन्हें त्रिपुरारी कहा।
इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति को ज्ञान और धन की प्राप्ति होती है। इस दिन चंद्रमा उदय के समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिवजी प्रसन्ना होते हैं। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान का फल मिलता है।
सिख संप्रदाय में कार्तिक पूर्णिमा का दिन प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन सिख संप्रदाय के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। नानकदेव सिखों के पहले गुरु हैं। इस दिन सिख संप्रदाय के अनुयायी सुबह गुरुद्वारे जाकर गुरुवाणी सुनते हैं। इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है।

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