Monday, 26 June 2017

साष्टांग प्रणाम क्यों

साष्टांग प्रणाम क्यों
हिंदू संस्कृति में चरण स्पर्श करना परंपरा ही नहीं, बल्कि आदर का स्वरूप है। वहीं, मनोवैज्ञानिकों का मत है, 'चरण स्पर्श करने से लक्ष्य को पाने का बल मिलता है।' चरण स्पर्श के कई तरीके है उनमें से एक है साष्टांग प्रणाम।
यह एक प्रकार का आसन है, जिसमें शरीर का हर भाग जमीन के साथ स्पर्श करता है। यह आसन इस बात का प्रतीक है कि व्यक्ति अपना अहंकार छोड़ चुका है। इस आसन के जरिए आप ईश्वर को यह बताते हैं कि आप उसे मदद के लिए पुकार रहे हैं। यह आसन आपको ईश्वर की शरण में ले जाता है। मगर शास्त्रों के अनुसार स्त्रियों को यह आसन करने की मनाही है, आइए बताते हैं क्यों।
इसलिए है मनाही
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार स्त्री का गर्भ और उसके वक्ष कभी जमीन से स्पर्श नहीं होने चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि उसका गर्भ एक जीवन को सहेजकर रखता है और वक्ष उस जीवन को पोषण देते हैं। इसलिए यह आसन स्त्रियों को नहीं करना चाहिए। वैसे धार्मिक दृष्टिकोण छोड़ दें तो साष्टांग प्रणाम करने के स्वास्थ्य लाभ भी बहुत ज्यादा हैं। ऐसा करने से आपकी मांसपेशियां पूरी तरह खुल जाती हैं और उन्हें मजबूती भी मिलती है।

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