Friday, 2 December 2016

जानने को कुछ नहीं रह गया है


जानने को कुछ नहीं रह गया है
गिरने दो विश्वास के वृक्ष का 
आखिरी तना
चिड़ियाएं सारी उड़ कर 
खो गयी हैं आकाश के एकांत में...
एक पत्ता टूट कर गिरता हुआ
तैरता है हवा में बेमतलब, बेचैन!
जड़ों के पास थोड़ी उखड़ी हुई
भुरभुरी मिट्टी है
और समाप्त हो गई 
एक संभावनापूर्ण कथा!

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