तो ऐसे हुआ था धर्म का जन्म💫
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार सूत के बेटे उग्रश्रवा बताते हैं कि जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना के लिए भगवान विष्णु से सहायता मांगी थी. ब्रह्मा की प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने अपने सीने पर हाथ रखकर मंत्रोच्चारण किया. कुछ ही समय बाद उनके सीने से एक चमकता हुआ मनुष्य अवतरित हुआ. उसे संसार की सभी बातों के बारे में जानकारी थी. वो किसी अज्ञानी को भी ज्ञान के मार्ग पर मोड़ सकता था. धर्म स्वभाव से बहुत निर्मल और शांत था. उसके चमकते मुख को देखकर किसी का भी क्रोध शांत हो जाता था. भगवान विष्णु और अन्य देवताओं ने उस व्यक्ति का नाम ‘धर्म’ रखा. जिसका मुख्य काम पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखना था. जब भी कोई व्यक्ति अपने धर्म से भटक जाता, तो धर्म उसके मन में समाकर उसे सत्य और ज्ञान से भर देता. पुराणों के आधार पर ऐसा माना जाता है कि धर्म युगों-युगों तक मनुष्य जाति के कल्याण के लिए धरती पर भेज दिया गया.
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