चाणक्य नीति की कुछ महत्त्वपूर्ण बाते
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महान मौर्य साम्राज्य की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चाणक्य को विष्णुगुप्त और कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है। चाणक्य मौर्य साम्राज्य के महामंत्री होने के साथ- साथ तक्षशिला विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के आचार्य भी थे। अर्थशास्त्र के साथ ही राजनीति और कूटनीति में भी आचार्य पारंगत थे। अपनी कूटनीतियों के दम पर ही चाणक्य ने विदेशी शासक सिकंदर को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। साथ ही, एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को अखंड भारत का सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य बनाया। चाणक्य ने नीति शास्त्र की रचना भी की थी, जिसमें बताया गया है कि जीवन को सुखी और श्रेष्ठ बनाए रखने के लिए हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
चाणक्य कहते हैं...
सुनने से धर्म का ज्ञान होता हैं, द्वेष दूर होता है और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस तरह माया की आसक्ति भी दूर हो जाती है।
धनवान व्यक्ति के कई मित्र होते है। उसके कई सम्बन्धी भी होते हैं। धनवान को ही आदमी कहा जाता है और पैसे वालों को ही पंडित कह कर नवाजा जाता है।
एक लालची आदमी को वस्तु भेंट कर संतुष्ट करें। एक कठोर आदमी को हाथ जोड़कर संतुष्ट करें। एक मूर्ख को सम्मान देकर संतुष्ट करें। एक विद्वान आदमी को सच बोलकर संतुष्ट करें।
एक बेकार राज्य का राजा होने से यह बेहतर है कि व्यक्ति किसी राज्य का राजा ना हो। एक पापी का मित्र होने से बेहतर है की बिना मित्र का हो। एक मुर्ख का गुरु होने से बेहतर है कि बिना शिष्य वाला हो। एक बुरी पत्नी होने से बेहतर है कि बिना पत्नी वाला हो।
शेर से सीखें कि आप जो भी करना चाहते हो जिंदादिली और जबरदस्त प्रयास से करें।
इन्द्रियों को बगुले की तरह वश में करें, यानी अपने लक्ष्य को जगह, समय और योग्यता का पूरा ध्यान रखते हुए पूर्ण करें।
मुर्गे से हे चार बाते सीख सकते हैं पहली- सही समय पर उठें। दूसरी- नीडर बने तीसरी- संपत्ति का रिश्तेदारों से उचित बटवारा करें और चौथी बात अपने कष्ट से अपना रोजगार प्राप्त करें।
श्वान से ये चार बात सीख सकते हैं पहली- बहुत भूख हो पर खाने को कुछ ना मिले या कम मिले तो भी संतोष करें। दूसरी- गहरी नींद में हो तो भी तुरंत क्षण में उठ जाएं। तीसरी- अपने स्वामी के प्रति ईमानदारी रखें। और चौथी बात निडर रहें।
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