Saturday, 26 November 2016

और जब निराशा के बादल गहराए

                                              और जब निराशा के बादल गहराए🍁


जीवन में कई ऐसे मौके आते हैं जब हम बेहद निराश और उदास होते हैं। ऐसे मौके पर हमें खुद को अपने परिवेश की अच्छी चीजों की याद दिलानी पड़ती है। ऐसा करने से नकारात्मक चीजें अपने आप विलुप्त हो जाती हैं। दुख के बारे में भी उत्सव की दृष्टि ही रखें। जैसे कि जब भी आप उदास हो तो उदासी के साथ तादात्म्य न बनाएं, साक्षी बनें रहें और उदासी की घड़ी का मज़ा लें क्योंकि उदासी का अपना एक सौंदर्य है, जो आपने कभी देखा ही नहीं। आप अपने को उदासी से इस तरह जोड़ लेते है कि उदास घड़ी की गहराइयों का सौंदर्य देख ही नहीं
पाते। अगर आप ऐसा देख सको तो पाएंगे कि आप कितने ही खज़ानों को चूक रहे है। उदासी में एक तरह की गहराई होती है; और खुशी में उथलापन रहता है। तो जब भी उदासी और निराशा का बादल गहराए तो इन याद रखें ये बातें-
 मौके हर जगह हैं। दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है जो आपकी मदद कर सकते हैं और आपको प्रेरित कर सकते हैं।
 अगर आपको अपने बारे में कुछ पसंद नहीं है तो उसे आप कभी भी बदल सकते हैं।
 कुछ भी उतना बुरा नहीं है जितना कि दिखता है।
 जीवन सुलझा होता है इसे उलझाएं नहीं।
 असफलताएं और गलतियां आशीर्वाद और वरदान हैं।
 ये पूरी सृष्टि हमेशा आपके पक्ष में काम करती है न की विरोध में।
हर अगला दिन आपके लिए नयी उमीदों का भण्डार लेकर आता है।
 वक्त सारे घाव भर देता है। 

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