और जब निराशा के बादल गहराए🍁
जीवन में कई ऐसे मौके आते हैं जब हम बेहद निराश और उदास होते हैं। ऐसे मौके पर हमें खुद को अपने परिवेश की अच्छी चीजों की याद दिलानी पड़ती है। ऐसा करने से नकारात्मक चीजें अपने आप विलुप्त हो जाती हैं। दुख के बारे में भी उत्सव की दृष्टि ही रखें। जैसे कि जब भी आप उदास हो तो उदासी के साथ तादात्म्य न बनाएं, साक्षी बनें रहें और उदासी की घड़ी का मज़ा लें क्योंकि उदासी का अपना एक सौंदर्य है, जो आपने कभी देखा ही नहीं। आप अपने को उदासी से इस तरह जोड़ लेते है कि उदास घड़ी की गहराइयों का सौंदर्य देख ही नहीं
पाते। अगर आप ऐसा देख सको तो पाएंगे कि आप कितने ही खज़ानों को चूक रहे है। उदासी में एक तरह की गहराई होती है; और खुशी में उथलापन रहता है। तो जब भी उदासी और निराशा का बादल गहराए तो इन याद रखें ये बातें-
पाते। अगर आप ऐसा देख सको तो पाएंगे कि आप कितने ही खज़ानों को चूक रहे है। उदासी में एक तरह की गहराई होती है; और खुशी में उथलापन रहता है। तो जब भी उदासी और निराशा का बादल गहराए तो इन याद रखें ये बातें-
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