Saturday, 26 November 2016

संस्कार का महत्त्व

संस्कार का महत्त्व

हर इंसान के लिए संस्कार आवश्यक हैं। संस्कार करने के पीछे प्रमुख कारण है, हर इंसान को प्रकृति के नियमों से परिचित कराना और जिस समाज में हम रहते हैं, उस समाज के सामाजिक नियमों से परिचित कराना। मानव और प्राणी इनमें बहुत बड़ा फर्क है। प्राणी के सृष्टि में जन्म लेते समय ही परमेश्वर उसे ज्ञान देता है। इसलिए प्राणियों को सिखाने की जरूरत नहीं होती। जन्म लेते समय ही प्राणी को ज्ञान की देन मिलती है। मानव में जन्म से जो ज्ञान होता है, वह सुप्त रूप में होता है। यह ज्ञान प्रत्यक्ष रूप में बाहर से दिखाई नहीं देता। अपने शरीर की सफाई का ज्ञान मानव में जन्म से नहीं होता। गाय का बछड़ा जन्म लेते ही कूदने लगता है। शरीर की सफाई कैसे की जाए, उस बछड़े को सिखाना नहीं पड़ता। उसके शरीर की रचना ही ऐसी होती है कि मलमूत्र उसके शरीर पर नहीं गिरता। मानव शरीर में यह बात नहीं होती। यही कारण है कि बच्चे का शरीर साफ करना, उसे खाना खिलाना, कोई दूसरा करता है। बच्चा जैसे जैसे बड़ा होता है, उसे इन बातों का ज्ञान होता जाता है। इस प्रकार का जो ज्ञान दिया जाता है, उसे संस्कार कहते हैं। इन्ही संस्कारों के कारण बच्चों को ज्ञान प्राप्त होता है। मानव को सबसे पहले उसके शरीर से संबंधित ज्ञान देना पड़ता है। इसी प्रकार उसकी बुद्धि का परिचय भी कोई दूसरा ही उसे देता है। हर इंसान को जन्म से ही बुद्धि होती है, किंतु उसे उसका परिचय नहीं होता या ज्ञान नहीं होता। यह ज्ञान उसे अनुकरण से और मार्गदर्शन से ही प्राप्त होता है। इन दोनों तरीकों से जैसे जैसे ज्ञान प्राप्त होता है, वैसे वैसे मानव को प्राकृतिक तथा सामाजिक नियमों का परिचय होता जाता है। दोनों तरह के नियमों का परिचय सही तरीके से ना हो, तो इंसान पशुवत् ही रह जाएगा। यही कारण है कि इन बातों का ज्ञान होने के लिए संस्कारों की जरुरत होती है।

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