सावन सोमवार का व्रत
आदिकाल से ही सावन माह में सोमवारी व्रत का विशेष महत्त्व है। इस वर्ष सावन की शुरुआत 20 जुलाई से हो रही है। इस माह का प्रथम सोमवारी व्रत सोमवार 25 जुलाई 2016 को मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि सावन के सोमवार का व्रत करने से इच्छित वर की प्राप्ति होती है।
सोमवार की पूजा विधि
इस दिन प्रातः काल उठे, स्नान आदि से निवृत होकर भगवान शिवजी, माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी एवम नंदी जी की पूजा करें। पूजा की दिशा पूर्व अथवा उत्तर हो। भगवान शिव जी को पंचामृत से जलधारा स्नान करायें। तत्पश्चात भगवान शिव जी की गंध, फल, फूल, चन्दन, बेलपत्र, भांग-धतूरा, दूर्वा आदि से पूजा करें तथा शिव चालीसा का पाठ एवम ॐ नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण करें। अंत में भगवान शिव जी की आरती करें।
इस दिन प्रातः काल उठे, स्नान आदि से निवृत होकर भगवान शिवजी, माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी एवम नंदी जी की पूजा करें। पूजा की दिशा पूर्व अथवा उत्तर हो। भगवान शिव जी को पंचामृत से जलधारा स्नान करायें। तत्पश्चात भगवान शिव जी की गंध, फल, फूल, चन्दन, बेलपत्र, भांग-धतूरा, दूर्वा आदि से पूजा करें तथा शिव चालीसा का पाठ एवम ॐ नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण करें। अंत में भगवान शिव जी की आरती करें।
सावन के सोमवार के व्रत की कथा
एक कथा के अनुसार जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव भगवान शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने सावन के महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया। यही कारण है कि सावन के महीने में सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए कुंवारी लड़कियों व्रत रखती हैं।
एक कथा के अनुसार जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव भगवान शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने सावन के महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया। यही कारण है कि सावन के महीने में सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए कुंवारी लड़कियों व्रत रखती हैं।
श्रावण मास शिव उपासना महत्त्व
भगवान शिव को श्रावण मास सबसे अधिक प्रिय है। इस माह में प्रत्येक सोमवार के दिन भगवान श्री शिव की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। महिलाएं सावन के 16 सोमवार के व्रत अपने वैवाहिक जीवन की लंबी आयु और संतान की सुख-समृ्दि्ध के लिये करती है, तो यह अविवाहित कन्याएं इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा से कर मनोवांछित वर की प्राप्ति करती है। इस मास में भक्त भगवान शंकर का पूजन व अभिषेक करते है। सभी देवों में भगवान शंकर के विषय में यह मान्यता प्रसिद्ध है, कि भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते है।
भगवान शिव को श्रावण मास सबसे अधिक प्रिय है। इस माह में प्रत्येक सोमवार के दिन भगवान श्री शिव की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। महिलाएं सावन के 16 सोमवार के व्रत अपने वैवाहिक जीवन की लंबी आयु और संतान की सुख-समृ्दि्ध के लिये करती है, तो यह अविवाहित कन्याएं इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा से कर मनोवांछित वर की प्राप्ति करती है। इस मास में भक्त भगवान शंकर का पूजन व अभिषेक करते है। सभी देवों में भगवान शंकर के विषय में यह मान्यता प्रसिद्ध है, कि भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते है।
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