बीरबल
अकबर के दरबार में बादशाह व दरबारियों के मध्य वार्तालाप चल रहा था। अकबर ने दरबारियों से पूछा- दुनिया में सबसे उजली वस्तु कौन-सी है? एक ने कहा-जहांपनाह! दुनिया में सबसे उजली वस्तु रूई है तो दूसरे ने कहा दूध। फिर तो अच्छी- खासी बहस होने लगी। यह देख बीरबल को हंसी आ गई। बीरबल को हंसते देख अकबर ने उनसे प्रश्न का उत्तर मांगा तो बीरबल बोले- हुजूर! मेरे विचार में प्रकाश सर्वाधिक उजली वस्तु है। अकबर ने इसे सिद्ध करने के लिए कहा तो बीरबल ने कुछ दिन का समय मांगा। अकबर ने उनकी बात मान ली। कुछ दिनों बाद अकबर से मिलने बीरबल उनके महल गए। अकबर सिर पकड़कर बैठे मिले। पूछने पर उन्होने सिरदर्द की शिकायत की। तब बीरबल ने कहा-आप थोडी देर सिर पर कपड़ा बांधकर सो जाइए मैं कमरे के सभी दरवाजे-खिड़कियां बंद कर देता हूं। अकबर, बीरबल के कहे अनुसार सो गए। तब बीरबल ने उनके कमरे के द्वार के पास रूई का ढेर लगा दिया और एक पतीली में दूध भरकर रख दिया। जब वे जागे तो अंधेरे में उनका पैर रूई के ढेर पर पड़ गया. वहां से हटे तो दूध की पतीली से टकरा गए। जैसे-तैसे द्वार खोला। द्वार खुलते ही कमरे में उजाला हो गया। बाहर आकर बीरबल ने माजरा पूछा तो उन्होने कहा- कोई वस्तु चाहे जितनी उजली हो, जब तक उस पर प्रकाश नहीं पड़ता, उसे कैसे देखा जा सकता है?
सार यह है कि कभी-कभी कोई सत्य प्रत्यक्ष होते हुए भी जन समाज द्वारा मान्य न हो तो उसे तर्क द्वारा प्रमाणित करने की योग्यता होनी चाहिए।
वस्तुत: तर्कशीलता ही व्यक्ति की बुद्धिमानी सिद्ध करती है।
सार यह है कि कभी-कभी कोई सत्य प्रत्यक्ष होते हुए भी जन समाज द्वारा मान्य न हो तो उसे तर्क द्वारा प्रमाणित करने की योग्यता होनी चाहिए।
वस्तुत: तर्कशीलता ही व्यक्ति की बुद्धिमानी सिद्ध करती है।
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