Thursday, 5 July 2018

सेवन थम्ब रूल्स फॉर वेट मैनेजमेंट


वजन कम करने
एवं
नियंत्रित रखने के
" सेवन थम्ब रूल्स फॉर वेट मैनेजमेंट "

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आज के समाज में वजन बढ़ना व बढते रहना एक आम समस्या है।
आमतौर पर देखा गया है कि लोग वजन कम करने के लिए काफी उपाय करते हैं लेकिन फिर से कुछ समय बाद वजन बढ़ना शुरू हो जाता है।
हमारे हजारों लोगों को ठीक करने एवं उनका वजन नियंत्रित रखने के अनुभव के आधार पर हम आज आपके सामने संक्षेप में
" सेवन थम्ब रूल्स फॉर वेट मैनेजमेंट " प्रस्तुत करने जा रहे हैं।

1👥सुबह जागने का समय:-
सर्दी हो या गर्मी का मौसम सुबह बिस्तर से उठने का एक ही नियम है कि जब सूर्य उदय हो ।
गर्मीयों में 5 बजे तक एवं सर्दीयों में सुबह 6 बजे तक हमें बिस्तर का त्याग कर देना चाहिए।
इसको आयुर्वेद के अनुसार समझने की कोशिश करें कि मोटापा वात पित्त एवं कफ में से कफज रोग माना गया है ,सुर्योदय के पश्चात कफज काल शुरू हो जाता है अतः उस समय सोने से कफ दोष बढ़ता है । यदि आप ऐसा करते हैं तो आप का वजन कम करना एक दुश्कर कार्य है।

2👥 व्यायाम :-
इस शब्द को समझना जरूरी है,
सबसे पहले आप को देखना होगा कि आप की सारे  दिन की शारीरिक गतिविधि कितनी है।
यदि आप दिन में आठ दस किलोमीटर तक पैदल चलते है, यदि आप दिन में काफी बार सीढीयों का प्रयोग करते हैं ,वगैरह वगैरह , इस तरह की लाइफ स्टाइल वाले व्यक्ति को ज्यादा व्यायाम के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है।
लेकिन यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आप को सुबह 30-45 मिनट तक योग,सैर एवं व्यायाम करना चाहिए।

3👥 नाश्ता:-
दिन की शुरुआत काफी महत्वपूर्ण होनी चाहिए। सुबह नाश्ते में प्रोटीन का सेवन करें। अंकुरित साबुत मूंग, सूखे मेवे, इत्यादि का सेवन करें। सभी तरह के अनाज का बदल बदल कर सेवन करना चाहिए।
नाश्ते में बिना छौंक लगाएं भोजन हमेशा अच्छा रहता है।

4👥 दोपहर का भोजन :-
हमारे हिसाब से दिन में दो बार ही भोजन करना चाहिए। दोपहर में यदि आप कुछ खाना चाहते हैं तो या तो भरपेट सलाद या भरपेट फल खा सकते हैं।

दोपहर के भोजन में मूंग की दाल की खिचड़ी या  अंकुरित मूंग सलाद के साथ खा सकते हैं।
रात के खाने में उबली हुई सब्जियां  साथ में दलिया ले सकते हैं
शाम को  वेजिटेबल सूप नींबू पानी या हर्बल टी पी सकते
पानी पीने के तुरंत बाद एक कप हर्बल टी  पी सकते हैं

5👥 रात का भोजन :-
रात का भोजन हो सके तो सूर्य अस्त के समय के बाद कर लें। यदि आप इस समय खाना खाना चाहते हैं तो चपाती व सब्जी, चटनी ले सकते हैं।
लेकिन यदि इस बाद थोडा समय लेते हैं तो चपाती हटा कर दलिया कर दें।
यदि और थोड़ा देरी से भोजन करना चाहते हैं तो सिर्फ उबली सब्जियां ले सकते हैं।
रात 9बजे के बाद खाना नहीं खाना चाहिए।

6👥 नींद:-
आमतौर पर सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए।
सोने का समय 9-10 बजे तक उचित है।
यदि आप देरी से सोना चाहतें हैं तो भी सुबह उठने का समय जैसे पहले लिखा है वैसे ही होगा।

7👥 पानी:-
हमारा शरीर लगभग 40% ठोस है व लगभग 60% तरल है लेकिन कमाल की बात है कि हम हमेशा तीन बातें ही करते हैं कि नाश्ते में क्या बना है, लंच में क्या खाएंगे व डिनर में आज क्या होगा।
कभी सोचा है कि जो हमारे शरीर का साठ प्रतिशत है उसका क्या करना चाहिए?
आज हम आपको उस के बारे में जानकारी देंगे।
सुबह उठते ही एक से दो गिलास गुनगुना पानी पिएं।
एक एक घूंट करके पीएं।
खाने से लगभग 30-40 मिनट पहले तक पानी पीना चाहिए।
खाने के साथ पानी नहीं पीना चाहिए।
खाने के बाद लगभग 45-60 मिनट के बाद पानी पीना चाहिए वह भी सिर्फ तीन चार घूंट।
उसके बाद सारा दिन लगभग हर एक से डेढ़ घंटे के अंतराल पर हमें पानी पीना चाहिए।
यदि आप मेहनत कर रहे हैं, पसीना आ रहा है,धूप में है तो जितनी प्यास लगी है उतना पानी पीना चाहिए।
यदि आप आराम कर रहे हैं,सर्दी का मौसम है,ए सी में बेठै है तो सिर्फ तीन चार घूंट पानी पीना चाहिए।

👥 विशेष :-
1🌷दूध और दूध से बनी चीजें ना सेवन करें।
2🌷खाना 32 बार चबा-चबाकर खांए।
3🌷मार्किट की बनी चीजें ना सेवन करें।
4🌷हर तरह की सब्जी व फल का सेवन करें।
5🌷व्ययाम जरूर करें।
6🌷दिन में दोपहर तक जूस,नारियल पानी एवं नींबू पानी पी सकते हैं।
7🌷दोपहर बाद शाम को सूप पी सकते हैं।

🙏
_"भगवान धन्वंतरि हम सब को सपरिवार स्वस्थ सुखी और समृद्ध रखें यही प्रार्थना"_🙏
🙏
धन्यवाद
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Monday, 2 July 2018

2 July

देश और दुनिया के इतिहास में आज 2 जुलाई का दिन कारणों से खास है. आज ही के दिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

1897: इतालवी वैज्ञानिक मार्कोनी ने लंदन में रेडियो का पैटेंट कराया.

1698: ब्रिटेन के थॉमस सेवरी ने पहले व्यवसायिक स्टीम इंजन का पेटेंट हासिल किया.

1916: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना हुई.

1972: आज ही के दिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.  

1990: सउदी अरब में मक्का से मीना की ओर जाने वाली सुरंग में भगदड़ मचने से 1,426 हज यात्रियों की मौत हो गई थी.

2001: फास्ट एंड फ्यूरियस सीरिज की पहली फिल्म रिलीज हुई थी.

डॉक्टर्स डे

डाक्टर्स डे (राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस)
डा. राधेश्याम द्विवेदी
   डाक्टर्स डे (राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस ) 1 जुलाई को भारत के लोगों द्वारा मनाया जाता है । भारत में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस एक बड़ा जागरुकता अभियान है जो सभी को मौका देता है डॉक्टरों की भूमिका, महत्व और जिम्मेदारी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के साथ ही साथ चिकित्सीय पेशेवर को इसके नजदीक आने और अपने पेशे की जिम्मेदारी को समर्पण के साथ निभाने के लिये प्रोत्साहित करता है। संपूर्णं चिकित्सीय पेशे के लिये सम्मान प्रकट करने के लिये डॉ बिधान चन्द्र रॉय की याद में इस दिन को मनाया जाता है।राष्ट्रीय चिकित्सीय दिवस के रुप में हर वर्ष 1 जुलाई को पहचान और मनाये जाने के लिये 1991 में भारतीय सरकार द्वारा डॉक्टर दिवस की स्थापना हुई थी। भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ बिधान चन्द्र रॉय (डॉ.बी.सी.रॉय) को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिये1 जुलाई को उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर इसे मनाया जाता है। उनका जन्म 1882 में बिहार के पटना जिले में हुआ था। कोलकाता में चिकित्सा शिक्षा पूर्ण करने के बाद डॉ. राय ने एमआरसीपी और एफआरसीएस की उपाधि लंदन से प्राप्त की। 1911 में उन्होंने भारत में चिकित्सकीय जीवन की शुरुआत की। इसके बाद वे कोलकाता मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता बने। वहां से वे कैंपबैल मेडिकल स्कूल और फिर कारमिकेल मेडिकल कॉलेज गए। उनकी ख्याति एक शिक्षक एवं चिकित्सक के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी के रूप में महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में शामिल होने के कारण बढ़ी। 4 फरवरी 1961 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। उनका जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना में हुआ था। रॉय साहब ने अपनी डॉक्टरी की डिग्री कलकत्ता से पूरी की और 1911 में भारत लौटने के बाद अपनी एमआरसीपी और एफआरसीएस की डिग्री लंदन से पूरी की और उसी वर्ष से भारत में एक चिकित्सक के रुप में अपने चिकित्सा जीवन की शुरुआत की। बाद में उन्होंने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से एक शिक्षक के रुप में जुड़ गये और इसके बाद वो कैंपबेल मेडिकल स्कूल गये और उसके बाद कारमाईकल मेडिकल कॉलेज से जुड़ गये। वो एक प्रसिद्ध चिकित्सक थे और नामी शिक्षाविद् होने के साथ ही एक स्वतंत्रता सेनानी के रुप में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान महात्मा गाँधी से जुड़े। बाद में वो भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के नेता बने और उसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री बने। इस दुनिया में अपनी महान सेवा देने के बाद 80 वर्ष की आयु में 1962 में अपने जन्मदिवस के दिन ही उनकी मृत्यु हो गयी। उनको सम्मान और श्रद्धंजलि देने के लिये वर्ष 1976 में उनके नाम पर डॉ.बी.सी. रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत हुई।
राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस क्यों मनाया जाता है:-डॉ बिधान चन्द्र रॉय पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री होने के साथ ही प्रसिद्ध और किंवदंती चिकित्सक को सम्मान देने के लिये 1 जुलाई को पूरे भारत भर में हर वर्ष राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस को मनाया जाता है। भारत में ये एक महान रीति है जो अपने महत्वपूर्णं भूमिका और जिम्मेदारी के साथ ही हर एक के जीवन में चिकित्सक की वास्तविक जरुरत को पूरा करने में मदद करती है। डॉक्टर्स की बहुमूल्य सेवा, भूमिका और महत्व के बारे में आम जन को जागरुक करने के लिये इस जागरुकता अभियान का वार्षिक उत्सव मदद करता है। भारत की विशाल जनसंख्या कई तरीकों से चिकित्सक और उनके गुणवत्तापूर्णं उपचार पर निर्भर करती है जो उपाय और उपचार के तरीकों में उल्लेखनीय सुधार और प्रगति को दिखाता है। अपने पेशे की ओर समर्पण की कमी के कारण अपने गिरते करियर से उठने के लिये भारत के सभी डॉक्टर्स के लिये ये एक आँख खोलने वाला और प्रोत्साहन के तरीके के रुप में डॉक्टर्स दिवस का वार्षिक उत्सव साबित हुआ है। कई बार सामान्य और गरीब लोग गैर-जिम्मेदार और गैर-पेशेवर के हाथों में फँस जाते हैं जो कई बार डॉक्टरों के खिलाफ लोगों की हिंसा और विद्रोह का कारण बन जाता है। जीवन बचाने वाले चिकित्सीय पेशे की ओर जिम्मेदारी को समझने के लिये तथा सभी डॉक्टर्स को एक ही जगह पर आकृष्ट करने के लिये ये जागरुकता अभियान एक महान रास्ता है। संपूर्णं पेशेवर डॉक्टरों के लिये सम्मान के दिन के रुप में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस उत्सव को चिन्हित किया जाता है जो मरीजों के जीवन को बचाने में अपना सारा बेहतरीन प्रयास लगा देते हैं। चिकित्सक दिवस अर्थात् एक पूरा दिन जो मेडिकल पेशे खासतौर से डॉक्टरों के प्रयासों और भूमिका को याद करने के लिये समर्पित हो। ये एक दिन है उन्हें ढ़ेर सारा धन्यवाद कहने का जिन्होंने अपने मरीजों का अनमोल ध्यान रखा, उन्हें लगाव और प्यार दिया।
राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे समारोह:- चिकित्सकों के योगदान के साथ परिचित होने के लिये सरकारी और गैर-सरकारी स्वास्थ्य सेवा संबंधी संगठन के द्वारा वर्षोँ से राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस उत्सव मनाया जा रहा है। इस उत्सव को मनाने के लिये स्वास्थ्य सेवा संबंधी संगठन के कर्मचारी विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और क्रियाकलाप आयोजित करते हैं। “उत्तरी कलकत्ता और उत्तर-पूर्व कलकत्ता समाज कल्याण संगठन” चिकित्सक दिवस के भव्य उत्सव को मनाने के लिये हर साल बड़ा कार्यक्रम आयोजित करती है। चिकित्सा पेशे के विभिन्न पहलूओं के बारे चर्चा करने के लिये एक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया जाता है जैसे स्वास्थ्य परीक्षण उपचार, रोकथाम, रोग की पहचान करना, बीमारी का उचित इलाज आदि। बेहतर और स्वस्थ सामाजिक विकास के लिये समुदायों में डॉक्टरों के द्वारा भी चक्रिय चिकित्सा सेवाओं को प्रोत्साहन और बढ़ावा दिया जाता है। आमजनों के बीच में बिना पैसे के गुणवत्तापूर्णं चिकित्सीय सेवाओं को बढ़ावा देने के लिये स्वास्थ्य देख-भाल संस्थानों के द्वारा सार्वजनिक जगहों और कई स्वास्थ्य केन्द्रों पर मुफ्त चिकित्सीय परीक्षण कैंप लगाए जाते हैं। वरिष्ठ नागरिक और गरीब लोगों के बीच स्वास्थ्य पोषण पर बातचीत और स्थायी बीमारी जागरुकता, स्वास्थ्य परामर्श, स्वास्थ्य स्थिति को आँकने के लिये सामान्य प्रदर्शन टेस्ट कैंप भी आयोजित किये जाते हैं। सभी के जीवन में डॉक्टर के बहुमूल्य भूमिका के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिये मुफ्त खून जाँच, आकस्मिक खून सूगर जाँच, इसीजी, इइजी, ब्लड प्रेशर जाँच आदि क्रिया-कलाप आयोजित किये जाते हैं। समर्पित मेडिकल पेशे की ओर ज्यादा युवा विद्यार्थियों को बढ़ावा देने के लिये स्कूल और कॉलेज स्तर पर कुछ गतिविधियाँ भी आयोजित की जाती है। चिकित्सक मुद्दे पर चर्चा, प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिता, खेल क्रियाएँ, रचनात्मक ज्ञान के लिये विद्यार्थियों के लिये वैज्ञानिक औजारों का उपयोग, मेडिकल पेशे को मजबूत और ज्यादा जिम्मेदार बनाने के लिये नयी और असरदार शैक्षणिक रणनीतियों को लागू करना। मेल के द्वारा ग्रीटिंग संदेश, उन्हें फूलों का गुच्छा या बुके देकर, इ-कार्ड, सराहना कार्ड, अभिवादन कार्ड वितरण करने के द्वारा 1 जुलाई को मरीज अपने डॉक्टर का अभिवादन करते है। मेडिकल पेशे की ओर डॉक्टर के उस दिन के महत्व और योगदान को याद करने के लिये डॉक्टर्स दिवस के द्वारा घर या नर्सिंग होम पर, अस्पाताल में पार्टी और डीनर स्वास्थ्य केन्द्र पर आयोजित किये जाते हैं, तथा खास सभाएँ होती हैं।
डॉक्टर अपने पेशे से चिंतित :- आजकल व्यावसायिकता की अंधी दौड़ में शामिल हो चुके चिकित्सकों को भी अब अपने पेशे को लेकर चिंता सताने लगी है। हालाँकि इस पेशे में बढ़ती व्यवसायिकता से सीनियर डॉक्टर काफी आहत हैं। लेकिन कुछ ऐसे डॉक्टर भी है जो अभी भी डॉक्टर पेशे के रूप में सेवाभाव जिंदा है। उन्हें फिर पुराने समय के लौटने की उम्मीद है।  डॉ. राम शर्मा के अनुसार बीमारी का कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव है। उन्होंने कहा कि बीमारी के इलाज से बेहतर उसका बचाव करना है। इसके लिए सभी ब्लड शुगर व उच्च रक्तचाप की जाँच अनिर्वाय रूप से करानी चाहिए।  डॉ. लखन सिंह का कहना है कि पुराने दिनों में हर फील्ड के लोग रुपए कमाने की अंधी दौड़ में शामिल होते थे, लेकिन डॉक्टरी पेशा इससे अछूता था। इसलिए डॉक्टरों को काफी सम्मान मिलता था। वर्तमान में स्थिति कुछ और ही है। इसके अलावा शासकीय सेवा से जुड़े डॉक्टर अभी भी सीमित संसाधनों के बाद भी अपने कर्तव्य को ईमानदारी के साथ पूरा कर रहे हैं। डॉ. पंकज के अनुसार डॉक्टर होना सिर्फ एक काम नहीं है, बल्कि चुनौतीपूर्ण वचनबद्धता है। उन्होंने कहा कि युवा डॉक्टरों को डॉ. बिधानचंद्र राय की तरह जवाबदारी पूरी कर डॉक्टरी पेशे को बदनाम होने से बचाने के लिए पहल करनी होगी। डॉ. सरिता अग्रवाल का कहना है कि यह दिन यह विचार करने के लिए है कि डॉक्टर हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वर्तमान में डॉक्टर पुराने सम्मान को प्राप्त करने के लिए संघर्ष करता हुआ नजर आ रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं। डॉक्टरों को अपनी जवाबदारियों का पालन ईमानदारी से करना सीखना होगा। डॉक्टरों की एक छोटी-सी भूल भी रोगी की जान ले सकती है।

जनता के विश्वास की डोर है डॉक्टर : वर्तमान में डॉक्टरी ही एक ऐसा पेशा है, जिस पर लोग विश्वास करते हैं। इसे बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी डॉक्टरों पर है। डॉक्टर्स डे स्वयं डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह उन्हें अपने चिकित्सकीय प्रैक्टिस को पुनर्जीवित करने का अवसर देता है। सारे डॉक्टर जब अपने चिकित्सकीय जीवन की शुरुआत करते हैं तो उनके मन में नैतिकता और जरूरतमंदों की मदद का जज्बा होता है, जिसकी वे कसम भी खाते हैं। इसके बाद कुछ लोग इस विचार से पथभ्रमित होकर अनैतिकता की राह पर चल पड़ते हैं। डॉक्टर्स डे के दिन डॉक्टरों को यह मौका मिलता है कि वे अपने अंतर्मन में झाँके, अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझें और चिकित्सा को पैसा कमाने का पेशा न बनाकर मानवीय सेवा का पेशा बनाएँ, तभी हमारा यह डॉक्टर्स डे मनाना सही साबित होगा।

Sunday, 9 July 2017

गुरु पूर्णिमा

😢😢

एक छोटे से शहर के प्राथमिक स्कूल में कक्षा 5 की शिक्षिका थीं।
उनकी एक आदत थी कि वह कक्षा शुरू करने से पहले हमेशा "आई लव यू ऑल" बोला करतीं। मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं कहती । वह कक्षा के सभी बच्चों से उतना प्यार नहीं करती थीं।
कक्षा में एक ऐसा बच्चा था जो उनको एक आंख नहीं भाता। उसका नाम राजू था। राजू मैली कुचेली स्थिति में स्कूल आजाया करता है। उसके बाल खराब होते, जूतों के बन्ध खुले, शर्ट के कॉलर पर मेल के निशान। । । व्याख्यान के दौरान भी उसका ध्यान कहीं और होता।
मिस के डाँटने पर वह चौंक कर उन्हें देखता तो लग जाता..मगर उसकी खाली खाली नज़रों से उन्हें साफ पता लगता रहता.कि राजू शारीरिक रूप से कक्षा में उपस्थित होने के बावजूद भी मानसिक रूप से गायब हे.धीरे धीरे मिस को राजू से नफरत सी होने लगी। क्लास में घुसते ही राजू मिस की आलोचना का निशाना बनने लगता। सब बुराई उदाहरण राजू के नाम पर किये जाते. बच्चे उस पर खिलखिला कर हंसते.और मिस उसको अपमानित कर के संतोष प्राप्त करतीं। राजू ने हालांकि किसी बात का कभी कोई जवाब नहीं दिया था।
मिस को वह एक बेजान पत्थर की तरह लगता जिसके अंदर महसूस नाम की कोई चीज नहीं थी। प्रत्येक डांट, व्यंग्य और सजा के जवाब में वह बस अपनी भावनाओं से खाली नज़रों से उन्हें देखा करता और सिर झुका लेता । मिस को अब इससे गंभीर चिढ़ हो चुकी थी।
पहला सेमेस्टर समाप्त हो गया और रिपोर्ट बनाने का चरण आया तो मिस ने राजू की प्रगति रिपोर्ट में यह सब बुरी बातें लिख मारी । प्रगति रिपोर्ट माता पिता को दिखाने से पहले हेड मिसट्रेस के पास जाया करती थी। उन्होंने जब राजू की रिपोर्ट देखी तो मिस को बुला लिया। "मिस प्रगति रिपोर्ट में कुछ तो प्रगति भी लिखनी चाहिए। आपने तो जो कुछ लिखा है इससे राजू के पिता इससे बिल्कुल निराश हो जाएंगे।" "मैं माफी माँगती हूँ, लेकिन राजू एक बिल्कुल ही अशिष्ट और निकम्मा बच्चा है । मुझे नहीं लगता कि मैं उसकी प्रगति के बारे में कुछ लिख सकती हूँ। "मिस घृणित लहजे में बोलकर वहां से उठ आईं।
हेड मिसट्रेस ने एक अजीब हरकत की। उन्होंने चपरासी के हाथ मिस की डेस्क पर राजू की पिछले वर्षों की प्रगति रिपोर्ट रखवा दी । अगले दिन मिस ने कक्षा में प्रवेश किया तो रिपोर्ट पर नजर पड़ी। पलट कर देखा तो पता लगा कि यह राजू की रिपोर्ट हैं। "पिछली कक्षाओं में भी उसने निश्चय ही यही गुल खिलाए होंगे।" उन्होंने सोचा और कक्षा 3 की रिपोर्ट खोली। रिपोर्ट में टिप्पणी पढ़कर उनकी आश्चर्य की कोई सीमा न रही जब उन्होंने देखा कि रिपोर्ट उसकी तारीफों से भरी पड़ी है। "राजू जैसा बुद्धिमान बच्चा मैंने आज तक नहीं देखा।" "बेहद संवेदनशील बच्चा है और अपने मित्रों और शिक्षक से बेहद लगाव रखता है।" "
अंतिम सेमेस्टर में भी राजू ने प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया है। "मिस ने अनिश्चित स्थिति में कक्षा 4 की रिपोर्ट खोली।" राजू ने अपनी मां की बीमारी का बेहद प्रभाव लिया। .उसका ध्यान पढ़ाई से हट रहा है। "" राजू की माँ को अंतिम चरण का कैंसर हुआ है। । घर पर उसका और कोई ध्यान रखनेवाला नहीं है.जिसका गहरा प्रभाव उसकी पढ़ाई पर पड़ा है। ""
राजू की माँ मर चुकी है और इसके साथ ही राजू के जीवन की चमक और रौनक भी। । उसे बचाना होगा...इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। "मिस के दिमाग पर भयानक बोझ हावी हो गया। कांपते हाथों से उन्होंने प्रगति रिपोर्ट बंद की । आंसू उनकी आँखों से एक के बाद एक गिरने लगे.
अगले दिन जब मिस कक्षा में दाख़िल हुईं तो उन्होंने अपनी आदत के अनुसार अपना पारंपरिक वाक्यांश "आई लव यू ऑल" दोहराया। मगर वह जानती थीं कि वह आज भी झूठ बोल रही हैं। क्योंकि इसी क्लास में बैठे एक उलझे बालों वाले बच्चे राजू के लिए जो प्यार वह आज अपने दिल में महसूस कर रही थीं..वह कक्षा में बैठे और किसी भी बच्चे से हो ही नहीं सकता था । व्याख्यान के दौरान उन्होंने रोजाना दिनचर्या की तरह एक सवाल राजू पर दागा और हमेशा की तरह राजू ने सिर झुका लिया। जब कुछ देर तक मिस से कोई डांट फटकार और सहपाठी सहयोगियों से हंसी की आवाज उसके कानों में न पड़ी तो उसने अचंभे में सिर उठाकर उनकी ओर देखा। अप्रत्याशित उनके माथे पर आज बल न थे, वह मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने राजू को अपने पास बुलाया और उसे सवाल का जवाब बताकर जबरन दोहराने के लिए कहा। राजू तीन चार बार के आग्रह के बाद अंतत:बोल ही पड़ा। इसके जवाब देते ही मिस ने न सिर्फ खुद खुशान्दाज़ होकर तालियाँ बजाईं बल्कि सभी से भी बजवायी.. फिर तो यह दिनचर्या बन गयी। मिस हर सवाल का जवाब अपने आप बताती और फिर उसकी खूब सराहना तारीफ करतीं। प्रत्येक अच्छा उदाहरण राजू के कारण दिया जाने लगा । धीरे-धीरे पुराना राजू सन्नाटे की कब्र फाड़ कर बाहर आ गया। अब मिस को सवाल के साथ जवाब बताने की जरूरत नहीं पड़ती। वह रोज बिना त्रुटि उत्तर देकर सभी को प्रभावित करता और नये नए सवाल पूछ कर सबको हैरान भी।
उसके बाल अब कुछ हद तक सुधरे हुए होते, कपड़े भी काफी हद तक साफ होते जिन्हें शायद वह खुद धोने लगा था। देखते ही देखते साल समाप्त हो गया और राजू ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया यानी दूसरी क्लास ।
विदाई समारोह में सभी बच्चे मिस के लिये सुंदर उपहार लेकर आए और मिस की टेबल पर ढेर लग गये । इन खूबसूरती से पैक हुए उपहार में एक पुराने अखबार में बद सलीके से पैक हुआ एक उपहार भी पड़ा था। बच्चे उसे देखकर हंस पड़े। किसी को जानने में देर न लगी कि उपहार के नाम पर ये राजू लाया होगा। मिस ने उपहार के इस छोटे से पहाड़ में से लपक कर उसे निकाला। खोलकर देखा तो उसके अंदर एक महिलाओं की इत्र की आधी इस्तेमाल की हुई शीशी और एक हाथ में पहनने वाला एक बड़ा सा कड़ा था जिसके ज्यादातर मोती झड़ चुके थे। मिस ने चुपचाप इस इत्र को खुद पर छिड़का और हाथ में कंगन पहन लिया। बच्चे यह दृश्य देखकर हैरान रह गए। खुद राजू भी। आखिर राजू से रहा न गया और मिस के पास आकर खड़ा हो गया। ।
कुछ देर बाद उसने अटक अटक कर मिस को बताया कि "आज आप में से मेरी माँ जैसी खुशबू आ रही है।"
समय पर लगाकर उड़ने लगा। दिन सप्ताह, सप्ताह महीने और महीने साल में बदलते भला कहां देर लगती है? मगर हर साल के अंत में मिस को राजू से एक पत्र नियमित रूप से प्राप्त होता जिसमें लिखा होता कि "इस साल कई नए टीचर्स से मिला।। मगर आप जैसा कोई नहीं था।" फिर राजू का स्कूल समाप्त हो गया और पत्रों का सिलसिला भी। कई साल आगे गुज़रे और मिस रिटायर हो गईं। एक दिन उन्हें अपनी मेल में राजू का पत्र मिला जिसमें लिखा था:
"इस महीने के अंत में मेरी शादी है और आपके बिना शादी की बात मैं नहीं सोच सकता। एक और बात .. मैं जीवन में बहुत सारे लोगों से मिल चुका हूं।। आप जैसा कोई नहीं है.........डॉक्टर राजू
साथ ही विमान का आने जाने का टिकट भी लिफाफे में मौजूद था। मिस खुद को हरगिज़ न रोक सकती थीं। उन्होंने अपने पति से अनुमति ली और वह दूसरे शहर के लिए रवाना हो गईं। शादी के दिन जब वह शादी की जगह पहुंची तो थोड़ी लेट हो चुकी थीं। उन्हें लगा समारोह समाप्त हो चुका होगा.. मगर यह देखकर उनके आश्चर्य की सीमा न रही कि शहर के बड़े डॉ, बिजनेसमैन और यहां तक कि वहां पर शादी कराने वाले पंडितजी भी थक गये थे. कि आखिर कौन आना बाकी है...मगर राजू समारोह में शादी के मंडप के बजाय गेट की तरफ टकटकी लगाए उनके आने का इंतजार कर रहा था। फिर सबने देखा कि जैसे ही यह पुरानी शिक्षिका ने गेट से प्रवेश किया राजू उनकी ओर लपका और उनका वह हाथ पकड़ा जिसमें उन्होंने अब तक वह सड़ा हुआ सा कंगन पहना हुआ था और उन्हें सीधा मंच पर ले गया। माइक हाथ में पकड़ कर उसने कुछ यूं बोला "दोस्तों आप सभी हमेशा मुझसे मेरी माँ के बारे में पूछा करते थे और मैं आप सबसे वादा किया करता था कि जल्द ही आप सबको उनसे मिलाउंगा।।।........यह मेरी माँ हैं - ------------------------- "
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!! प्रिय दोस्तों.... इस सुंदर कहानी को सिर्फ शिक्षक और शिष्य के रिश्ते के कारण ही मत सोचिएगा । अपने आसपास देखें, राजू जैसे कई फूल मुरझा रहे हैं जिन्हें आप का जरा सा ध्यान, प्यार और स्नेह नया जीवन दे सकता है...........

Monday, 3 July 2017

मैं कभी भी शराब पीते हुए रिस्क नहीं लेता

मैं कभी भी शराब पीते हुए रिस्क नहीं लेता।
By awdhesh ji
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मैं ऑफिस से शाम को घर पे आया तो बीवी खाना बना रही थी।

हाँ, मुझे रसोई से बर्तनों की आवाज़ आ रही है।

मैं छुपके से घर में घुस गया

काले रंग की अलमारी में से ये मैंने बोतल निकाली

शिवाजी महाराज फ़ोटो फ्रेम में से मुझे देख रहे हैं

पर अब भी किसी को कुछ पता नहीं लगा

क्योंकि मैं कभी रिस्क नहीं लेता।
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मैंने पुरानी सिंक के ऊपर वाली रैक से गिलास निकाला

और फटाक से एक पेग गटक लिया।

गिलास धोया, और उसे फिर से रैक पे रख दिया।

बेशक मैंने बोतल भी अलमारी में वापस रख दी

शिवाजी महाराज मुस्कुरा रहे हैं

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मैंने रसोई में झांका

बीवी आलू काट रही है।

किसी को कुछ पता नहीं चला के मैंने अभी अभी क्या किया

क्योंकि मैं कभी रिस्क नहीं लेता।
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मैं बीवी से पूछा: चोपड़ा की बेटी की शादी का कुछ हुआ ?

बीवी : नहीं जी, बड़ी ख़राब किस्मत है बेचारी की। अभी लड़का देख ही रहे हैं वो लोग उसके लिए।
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मैं फिर से बाहर आया, काली अलमारी की हलकी सी आवाज़ हुई

पर बोतल निकालते हुए मैंने बिल्कुल आवाज़ नहीं की

सिंक के ऊपर वाली पुरानी रैक से मैंने गिलास निकाला

लो जी फटाफट दो पेग और मार लिए
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बोतल धोयी और संभाल के सिंक में रख दी

और काले गिलास को अलमारी में भी रख दिया

पर किसी को अब भी हवा तक नहीं लगी के मैंने क्या किया

क्योंकि मैं कभी रिस्क नहीं लेता
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मैं बीवी से : फिर भी ! चोपड़ा की लड़की की अभी उम्र ही क्या है

बीवी: क्या बात कर रहे हो जी !!! 28 की हो गयी है...बूढ़ी घोड़ी की तरह दिखने लगी है।

मैं: (भूल ही गया कि उसकी उम्र तो 28 साल है) अच्छा अच्छा..
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मैंने फिर से मौका देख के काली अलमारी में से आलू निकाले

पर पता नहीं यार अलमारी की जगह कैसे अपने आप बदल गयी!

ये मैंने रैक से बोतल निकाली, सिंक में एक पेग बनाया और गटागट पी गया
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शिवाजी महाराज बड़ी जोर जोर से हँस रहे हैं

रैक को ये मैंने आलू में रक्खा, शिवाजी महाराज की फ़ोटो भी ढंग से धो दी और लो जी काली अलमारी में भी रख दी
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बीवी क्या कर रही है, हाँ ! वो सिंक चूल्हे पे चढ़ा रही है।

पर अब भी किसी को कुछ पता नहीं चला के मैंने क्या किया

क्योंकि! क्योंकि मैं कभी रिस्क नहीं लेता।
(ये हुचकि क्यों आ रही है, कौन याद किया मेरे को)
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मैं बीवी से: (गुस्सा होते हुए) तुमने चोपड़ा साहब को घोड़ा बोला? अगर तुमने दोबारा ऐसा बोला तो तुम्हारी ज़ुबान काट दूंगा...!

बीवी: हाँ बाबा बड़बड़ाओ मत ! शांति से बैठो तुम अब बाहर जाकर, इस समय वही ठीक है तुम्हारे लिए...
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मैंने आलू में से बोतल निकाली

काली अलमारी में गया और अपने पेग के मजे लिए

सिंक धोया और उसको रैक के ऊपर रख दिया

बीवी फ्रेम में से अब भी मुस्कुरा रही है
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शिवाजी महाराज खाना बनाने में बिजी हैं

पर अब भी किसी को कुछ नहीं पता मैंने क्या किया

क्योंकि मैं रिस्क लेता ही नहीं ना यार
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मैं बीवी से : (हँसते हुए) तो चोपड़ा घोड़े से शादी कर रहा है!!

बीवी: सुनो ! जाओ, तुम पहले अपने मुँह पे पानी के छपाके मारो...
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मैं फिर रसोई में गया और चुपचाप रैक पे बैठ गया

चूल्हा भी रखा है रैक पे

बाहर कमरे से बोतल की आवाज़ सी आई
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मैंने झाँका और देखा की बीवी सिंक में बैठी पेग के मजे ले रही है

पर अब तक किसी भी घोड़े को पता नहीं लगा के मैंने क्या किया

क्योंकि शिवाजी महाराज कभी रिस्क नहीं लेते
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चोपड़ा साला अब भी खाना बना रहा है

और मैं फ़ोटो में से अपनी बीवी को देख रहा हूँ और हँस रहा हूँ

क्योंकि! क्योंकि मैं कभी! क्योंकि मैं कभी क्या नहीं लेता यार??? हाँ !!! मैं कभी आलू नहीं लेता... शायद!

Cheers!!🍺🍻🍸🍹🍷= 😜

Thursday, 29 June 2017

About GST by Narendra Dubey

पति दफ्तर से आते ही मोबाइल में घुस गए और फेसबुक , व्हाट्सऐप पर उठापटक शुरू !
 पत्नी चाय लेकर बोली :- ये क्या चल रहा है ,सुना है बड़ा डर है बाजार में ,  GST तो व्यापारियों के लिए स्काई लैब बन गया है , सभी समझ रहे हैं कि स्काई लैब उनकी ही दुकान पर गिरेगा ! आप मुझे घर की भाषा में समझाइये न ?
मैं बोला :- अरे सीधी सी बात है , समझ लो तुम जब ( GST) यानि   Gharwali Surprise Tax  लगाती हो ! जैसे जब  तुम कहती हो कि जेब में कुछ रूपये  भी डाल लेना , मुझे बाजार से शॉपिंग भी करनी है , यही है पति के लिए ( GST)  ! अब तुमसे पूछो कि क्या - क्या लेना है तो तुम गोलमोल जवाब देती हो , यहाँ कम से कम  सरकार परसेंट तो बता रही है , फिर भी पता नहीं  व्यापारी क्यों डर रहे हैं ? जबकि बनाने वाले पर टैक्स शुरू हो रहा है !
पत्नी बात काट कर बोली :- बनाने वाले पर टैक्स यानि तुम्हारी फेसबुक  पोस्ट पर भी टैक्स लगेगा ? तुम भी तो बनाते हो , मैं तो कहती हूँ अभी भी वक़्त है तुम्हारे पास , कॉपी - पेस्ट शुरू कर दो !
हमने कहा पगली फेसबुक पोस्ट बनाने पर नहीं बल्कि माल बनाने पर लगेगा ! वैसे एक बात याद आ गयी कि ऑफिस में बॉस को लगता है कि वो अपने मातहत को बना रहा है , जबकि मातहत को लगता है वो बॉस को , इसी प्रकार हर पत्नी अपने पति को बना रही होती  है जबकि पति समझता है कि वो अपनी पत्नी को बना रहा है ! यह सुनकर पत्नी का मुंह टमाटर की तरह हरा हो गया है और हमारे Ghar Se Tarr -Tarr यानि ( GST ) की आवाज़ बुलंद हो रही है अब जिसको कल संसद से आधी रात को जागकर घोषणा करनी है तो कर ले !

Bechara naukar by dr. Awdhes dube

संबित पात्रा अपने घर पहुंचे तो नौकर ने कहा :- "मालिक वो टयूब लाइट फ्यूज...."

संबित (उसकी बात बीच में ही काटते हुए) :- "सबसे पहले तो मैं आपको नमस्कार कहना चाहूँगा, आप हमारे बहुत अच्छे नौकर हैं और अपनी जिम्मेवारी का बहुत ही अच्छी तरह से वहन कर रहे हैं ... कृपया मुझे पांच मिनट समय दीजिये अपनी बात रखने का, मैं आपकी हर बात का जवाब दूँगा"

'... आप बात कर रहे हैं 'टयूब लाइट' फ्लॉप होने की ... क्या इससे पहले कोई फिल्म फ्लॉप नहीं हुई है क्या .... मोदी के दौर में 'टयूब लाइट' फ्लॉप हुई तो लगे सवाल करने .... आप तब कहाँ थे जब कांग्रेस के समय में 'मेरा नाम जोकर' को लोगों ने नकार दिया था ..'बोनी कपूर' की 'रूप की रानी चोरों का राजा' फ्लॉप हुई थी .... 'राम गोपाल वर्मा' की 'आग' बुझ गई थी ....'शाहरुख' की 'रा वन' पिट गई थी .... तब कभी आपने इटली वाली माता जी से पूछा था कि कांग्रेस के राज में इतनी बड़ी फ्लॉप हुई हैं? अरे उनकी तो खुद के देश के नाम की फिल्म इटालियन जॉब की रीमेक 'अब्बास मस्तान' की 'प्लेयर' पिट गई थी ...."

नौकर -- "साब वो मैं कह रहा था...."

संबित-- "नहीं नहीं, मुझे बोलने दीजिये .... जब आप बोल रहे थे तो मैं बीच में नहीं बोल रहा था ... अब आप मुझे एक मिनट दें, मुझे अपनी बात पूरी करने दें ... अगर आज आप 'टयूब लाइट' के फ्लॉप होने की बात कर रहे हो तो आज़ादी के बाद से अब तक हर फ्लॉप फिल्म का हिसाब लिया जाएगा .... अरे आप किस मुँह से सिनेमा की बात करते हैं ... इमरजेंसी में आपने तो 'गुलजार' की 'आंधी' पर सिर्फ इसलिय रोक लगा दी थी क्योंकि 'सुचित्रा सेन' का गेटअप  'इंदिरा जी' से मिलता था और 'किशोर' के गाने आकाशवाणी पे इसलिए नही बजने दिए गए क्योंकि उन्होंने 'संजय गांधी' की पार्टी में गाने से मना कर दिया था और आज आपको 'ट्यूबलाइट' याद आ गई ...आ हा हा हा"

नौकर :-  "साब मैं ये कह रहा था.. कि बेडरूम की ट्यूबलाइट फ्यूज हो गई है। पैसे दे दीजिए, नयी ले आता हूं।
संजय कश्यप